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गरीबी का सुख
Joy in Poverty
वह खेती करता था
जो कमाता था घर लाता था
खाने भर का तो हो ही जाता था
घर में सुख था
लेकिन वह न जाने किस लत में पड़ गया
उसे अपने मित्र से एक लाटरी का टिकट मिल गया
किस्मत साथ थी — उसकी लाटरी लग गयी
वह अति प्रसन्न हुआ
उसके हाथ पैसा आया
इसलिए वह गाँव छोड़कर शहर में आया
बड़ा भवन बनवा कर परिवार सहित रहने लगा
और एक बड़ा व्यापारी बन गया
पैसा कमाते कमाते उसकी तिजोरी भर गयी
कहाँ गरीबी थी अब अमीरी हो गयी
वो पत्नी और बच्चे जो पहले सात्विक थे
अब आधुनिक विचार के हो गये थे
सब अपने में ही व्यस्त से हो गये थे
किसी को उसका ध्यान न था
वह सड़कों पर भटक रहा था दुखी मन से
कि एक राह चलते व्यक्ति ने पूछा
तेरे पास इतना पैसा है फिर भी तू दुखी क्यों है यार
वह बोला पैसा तो बहुत है
बस एक वस्तु की कमी है — वो है प्यार ।
— Roli Shukla
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