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06 Social

कटु सत्य

Bitter Truth

— Roli Shukla
Social Poem 06
अन्धकारमय रात थी मात्र उल्लुओं की भयानक आवाजे सुनाई दे रहीं थीं उसने मुझे छुरा दिखाया, फिर मेरा माल हथियाया लूटते तो वो भी है, जबकि इतने अमीर है मैं गरीब हूँ इसलिए मेरा लूटा हुआ दिखता है वे छिप के लूटते है और मैं सामने लूटता है वह सचमुच जीवन के कटु यथार्थ को कह गया वो मेरा धन ले के चलता चला गया
— Roli Shukla
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