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08 Social

स्मृति

Memory

— Roli Shukla
Social Poem 08
इस गहन अन्धकार में अपनी स्मरण शक्ति के प्रकाश से उन स्मृतियों को स्मरण करने का प्रयत्न कर रहा है मन सभी हाथ में हाथ बाँधें एक साथ जा रहे है वर्तमान में तो मात्र कर्कशता और दानवता है भस्म हो गयी मेरी वो सब स्मृतियाँ बड़े यत्न से मैंने उन घावों को अपनी स्मृतियों के जल से धोया है
— Roli Shukla
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