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18 Patriotic

चेतावनी

Warning

— Roli Shukla
Patriotic Poem 18
हाहाकर से तपती इस अपनी ही धरती पर संकट के तुमुल बादल छाये है हम तब तक कुछ नहीं करते जब तक कोइ हमें विवश न करे सोये हुए सिंह को यदि छेड़ कर जगाओगे निश्चित रूप से भयंकर परिणाम पाओगे ये आज उनको, हमारी ओर से खुली चेतावनी है
— Roli Shukla
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