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02 Life Philosophy

महाभारत

Mahabharat

— Roli Shukla
Life Philosophy Poem 02
यदि हम ध्यान से देखें तो हमारा जीवन भी महाभारत के पात्रों के इर्द-गिर्द घूमता प्रतीत होगा हममें भीष्म जैसी प्रतिज्ञा करने की क्षमता तो है किन्तु हम उसे घृतराष्ट्र जैसी महत्वाकांशा से नष्ट कर देते है हममें कुन्ती जैसा धैर्य तो है किन्तु हम उसे गांधारी जेसी विवशता से तोड़ देते है हममें द्रोण जैसी विद्या तो है किन्तु हम उसे परशुराम जैसे क्रोध से भंग कर देते है यदि हम चाहते है कि फिर से कुरूक्षेत्र मे महाभारत न हो तो हमें सत्य और धर्म का पालन करना होगा अन्यथा इस आधुनिक काल के वही पुराना महाभारत का युद्ध अवश्य होगा ।
— Roli Shukla
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