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27 Spiritual

गुरुदेव

Revered Teacher

— Roli Shukla
Spiritual Poem 27
हे मेरे गुरुदेव करूणसिन्धु करूणा कीजिए बीच में नौका हमारी पार अब कर दीजिए है नहीं भय श्रम का हमको श्रम करेंगे हम सदा किन्तु उस श्रम का हमें थोड़ा-सा फल दे दीजिए भाग्य में जो लिख गया होना ही है उसको सदा भाग्य में यदि दुःख लिखा, तो सहनशक्ति दीजिए हम दुखों से हो के पीड़ित, शरण आपकी आये हैं हमको शरणागत जान के शरण में ले लीजिए जीवन में दो ही सहारे, एक प्रभु दूजे आप हैं शीश पर अब हाथ रख कर अभयदान दीजिए कहिए तो अर्पण भी कर दें अपना सब कुछ आपको आप पर विश्वास है उसको अमिट कर दीजिए हमने देखे थे बहुत, पर आपसा देखा नहीं अब हमारी ओर भी दया-दृष्टि से देखिये आप ने जब लोक-सेवा का व्रत ले ही लिया हे गुरु अब दुख निवारण भी हमारे कीजिए माना हम अज्ञानी हैं, असहाय हैं और तुच्छ हैं हे गुरु हमें बुद्धि दे के ज्ञान आलोकित कीजिए हर जगह भटके बहुत, तब ली शरण गुरु आपकी आप पर विश्वास है उसको अमिट कर दीजिए ।
— Roli Shukla
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