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तरु और मनु
Trees and Humans
हे मित्र जरा मेरी सुन लो
हमने किसका क्या बिगाड़ा है
क्षति पहुंचाते हैं नित्य हमें
मानव के खेल ये सारा है
हम उनको छाया देते हैं
फल-फूलों से भर देते हैं
फिर भी न जाने किस कारण, वह हमें काट रख देते हैं
माना मानव में बुद्धि है और मानव में है बड़ा ज्ञान
हम तो साधरण से पेड़ पर हममें भी होती है जान
मानव ने लिखा किताबों में कि जीव-हत्या है महापाप
फिर भी हम जीवित पेड़ों को क्यों देता वह शोक-सन्ताप
ईश्वर ने हमें बनाया है जीवन का हमें भी है अधिकार
फिर मानव के हम प्रतिदिन क्यों सहते हैं अत्याचार
इस पर दूसरा मित्र बोला सज्जन का आभूषण है धैर्य
तुम किंचित शोक न करो मित्र, अच्छा नहीं मानव से बैर
वन सम्पदा के आभाव में जब मानव कदम उठायेगा
तो स्वयं उसका उठा कदम, पीछे लौट के आयेगा
तब पता चलेगा, सभी वृक्ष उसके लिए थे वरदान
हे मित्र उसी दिन से सारे, वृक्षों का बढ़ जायेगा मान।
— Roli Shukla
Anandam Mindset Solutions