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41 Life Philosophy

मेरा जीवन

My Life

— Roli Shukla
Life Philosophy Poem 41
जीवन में मेरे सब कुछ था कुछ पुष्प भी थे कुछ काँटे भी हमने जीवन के सुख-दुख को कुछ हँस कर रो कर बाँटे भी चलता था जीवन कुछ ऐसे जैसे सागर में नौका हो लगता था कभी ऐसे जैसे एक मन्द पवन का झोंका हो दिन साथ बिताये जो हमने लगता था मधुर संगीत था वो जो साथ में मिल हमने गाया एक सचमुच सुन्दर गीत था वो ये जीवन का एक खेल ही है कुछ खोया हमने कुछ पाया पाया तो बहुत, बस जो खोया उसको खो कर फिर न पाया पर जीवन का ये सत्य ही है कुछ खोना है कुछ पाना है कुछ भी करना है, बस हमको इस सुख-दुःख को अपनाना है लेकिन इसमें बस मैं ही नहीं कोई और भी था मेरे संग में वो था मेरे इस अन्तर में और मैं भी थी उसके मन में बस ये विश्वास ही मेरे इस अपने जीवन का सपना था पर सपना जब सच्चाई बना लगता सचमुच वो अपना था वो है आधार इस जीवन का मैं भी उसका आधार ही हूँ चाहे सुख हो चाहे दुःख हो मैं सदा-सदा तैयार ही हूँ वो है मेरी प्रेरणा अधिक मेरा सारा संसार है वो मैं कुछ भी नहीं हूँ उसके बिना वो मेरे बिना अधूरा है हम दोनों का ये जीवन बस एक दूजे से ही पूरा है
— Roli Shukla
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